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हिंदी हमारी पहचान, हमारा अस्तित्व!

एक भाषा के रूप में हिंदी न केवल भारत की पहचान है बल्कि यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की संभवतः सबसे वैज्ञानिक भाषा है, जो हमारे पारंपरिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है।

हिंदी एक समृद्ध भाषा है जिसमें अभिव्यंजना की अपार क्षमता है। हिंदी भाषा में ही वह शक्ति है जिसके माध्यम से संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधा जा सकता है। हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार, वृद्धि और इसका विकास करना हमारा संवैधानिक अधिकार एवं नैतिक दायित्व भी है, ताकि हिंदी भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम हो सके।

हिंदी को हम भाषा की जननी, साहित्य की गरिमा एवं जन-जन की भाषा भी कहते हैं। भारतीय संविधान के अनुसार हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। प्रतिवर्ष 14 सितंबर का दिन ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करने तथा हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया जाता है।

हिंदी भाषा के माध्यम से साहित्य, बोलियों और क्षेत्रीय भाषाओं में समन्वय स्थापित कर हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा का गौरव दिलाने के उद्देश्य हेतु ‘हिंदी उत्कर्ष मंडल’ की स्थापना की गई है। यह दिल्ली सरकार द्वारा पंजीकृत शैक्षणिक, गैर-लाभकारी एवं गैर-सरकारी संस्था है। जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा को राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समृद्ध एवं व्यापकशील बनाना है।

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हिंदी शिक्षाविद

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